बाती बनूँ

Author By : Indu Sharma

बाती बनूँ   क्या चाहती हो तुम ? बोली वो बस यही ... तुम नदी ... मैं उसकी लहर, तुम्हारे साथ बहूँ ! तुम गुलाब, मैं साथ वाला काँटा बनूँ…

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पिता

Author By : Divya Saxena

पिता   पिता हो तो हिमावत जैसे दी है सीख समाज को ऐसे भेज दिया अपनी पुत्री को तप करने संकल्प को उसके समझा उन्होंने डटे रहे,सुनते रहे समाज के…

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मन की निर्बलता

Author By : Divya Saxena

मन की निर्बलता   सोचती हुँ कुछ लिखुँ मन की निर्बलता के बारे में महसूस होती जो कभी कभी वक्त-बेवक्त जिंदगी की राहों में ये कैसी व्यथा और पीडा़ हैं?…

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आस

Author By : Indu Sharma

आस   मैं बैठी थी इस आस में , की एक बार तो आओगे तुम! कहीं भी हो चाहे, मुझे कभी तो बुलाओगे तुम! ग़र भूल भी गए नाम मेरा,…

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सबसे बुद्धिमान मस्तिष्क!!

Author By : Shrutika sah

अक्सर... बच्चों की टोलियों के साथ बैठे बेवकूफिया करते पाए गए; दुनिया के सबसे बुद्धिमान मस्तिष्क!!   श्रुतिका साह  

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“एक औरत”

Author By : Harshita Yadav

वो खुली किताब भी है, और राज़ भी है, किसी के लिए पहले, तो किसी के लिए सबसे बाद मे है। औरत को कमज़ोर कहने वालों, आओ देखो, वो तुमसे…

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“स्त्री”

Author By : Harshita Yadav

सिर्फ अदाओं, कोमलता और सुंदरता से नही मापा जाता है स्त्रीतत्व लड़की का, वह मजबूत, फौलादी और कर्तव्यनिष्ठ भी हो सकती है...!!!❣ - हर्षिता🌻

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वतन की बेटियाँ

Author By : ABHISHEK NAYAK

बेक़सूर जिंदगियां तो रोज़ मिटा दी जाती हैं                  फ़िर ख़बरें अखबारों में क्यों नही आती हैं! बना देते है,हर रोज़ दरिंदे लड़कियों…

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एक तरफा प्यार

Author By : Aman kumar

वो ही मेरी एक दिल लगीं है, वो ही मेरी हर रातों का ख्वाब है, वो मेरी एक तरफा प्यार है| उसे छोड़ सब को मेरे दिल की खबर है,…

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आशा, उम्मीद और लय के साथ उदासियों को लिखे खत कविता है

Author By : Amandeep Gujral

उदासियों का रँग  मिलता है ढलते सूरज के रँग से  कई बार लगा ऐसा जब किसी / खबर के आने की उम्मीद ख़त्म हुई सहसा......     कई बार ऐसा…

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समीक्षा ”सुर की बारादरी” यतीन्द्र मिश्र

Author By : Nishant Purohit

मेरा काम अभी कच्चा है सच्चे सुर की तलाश में हूं परवरदिगार से इसी सुर की नेमत मांगता हूं – बिस्मिल्लाह खां   मित्रों यदि आप कभी बनारस नहीं गए…

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औरत की आवाज़

Author By : Viney Lohchab

मुझे अपनी ज़िंदगी में आई औरतों की आवाज़ याद नहीं जबकि मैंने इस जीवन में सबसे पहली आवाज़ शायद किसी औरत की ही सुनी होगी जो मुझे पैदा करने आई…

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लगातार बिगड़ता पर्यावरण

Author By : Aman kumar

लगातार बिगड़ता पर्यावरण "चाहत किसी चाहत का कम नहीं होता, जो बांध लेते चाहत को जीवन सुखमयी होता"| पहले कदमों से रास्तों को नापा करते, दिल- दिमाग, शरीर सब से…

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नींद

Author By : Nimisha Agnihotri

नींद मिलने को आँखों से बेकरार बैठी है ख्वाब हैं उनके कि रूखसत नहीं होते।।

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वक़्त के तक़ाज़े है…

Author By : Dr Afsar Safar

तुम मुझसे बिछड़ जाओ, मैं तुमसे बिछड़ जाऊँ...। ये कुछ और नहीं वक़्त के तकाज़े हैं...।।   अब तुम भी सम्भल जाओ और मैं भी सम्भल जाऊँ...। ये कुछ और…

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” एहसास-ए-दिल”

Author By : Harshita Yadav

दिल भर जाए जब दुनिया भर की उलझनों, उल्फतों से, जीवन के बंदिशों से, इस व्याकुल मन के शोर से,  काश कि उस वक्त मेरे दिल पर, कोई हाथ रख…

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Gazal

Author By : Om Awasthi

गिला हो प्यार हो ,कुछ भी हो दरमियान लगे कि बात करने में कुछ दिल को इत्मिनान लगे!   थे सामने ही मगर हम में इतनी दूरी थी कि दो…

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ताले

Author By : Sunil Kumar Lohamrod

ताले   सौंप रही थी घर की चाबियाँ बूढ़ी हो चुकी सास अपनी बहू को जिनको ताउम्र बाँधे रखा था सास से अपने नाड़े से। बहु ने मना कर दिया…

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तुम्हारे वादे

Author By : Indu Sharma

तुम्हारे वादे आह, चल दिए तुम आज फिर, कुछ और वादे कर! वादों का संदूक , अब भर सा गया है । अब ये बताओ , इतने वादे ले कर…

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रचना~कन्यादान

Author By : ABHISHEK NAYAK

क्षण भर में कितना बड़ा अहसान करता है! जब एक पिता बेटी का कन्यादान करता है! अपने  घर का  उजाला  देकर अँधेरे को सूने पड़े किसी आँगन को जिनान करता…

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रिश्ता पुराना

Author By : Indu Sharma

रिश्ता पुराना वो आँखों के इशारे, जो ना समझो अब तुम .. वो बात ही क्या !   या तुम समझ कर , नासमझी जतलाओ तुम ... वो जज़्बात ही…

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प्रेम ध्वज

Author By : कुणाल कंठ

वो सारे पीड़ा और नक्काशी किए सलाखें (जो जड़े गए है समाज से प्रेरित हो हर प्रेमी प्रेमिकाओं के पांव में ) उन्हें लांघ जब तुम मेरे शीश को चूमोगी…

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तितली

Author By : Indu Sharma

तितली   अगले जनम में तितली बनूँगी , रंग़ो से भरे फ़ूल और मैं ! ना पसंद आया कोई फ़ूल का रंग , तो अपने फ़ूल खुद चुनूँगी , रंग़ो…

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राख

Author By : Indu Sharma

मेरे ख़्वाबों की राख़ , मेरी चिता  की राख़ , पूजा की दिए की राख़ , किसी के महल की राख़ , ग़रीब की झोंपड़ी की राख़ , लकड़ी जलाने…

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जीवन सार

Author By : Divya Saxena

जीवन सार   पूर्णता और अपूर्णता के मध्य इस जीवन के मंथन में कभी पूर्णता के प्रति प्रयास में तो कभी अपूर्णता के खिंचाव में जीवन रुपी मंथन की निरंतरता…

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शहर में गाँव जैसा कुछ

Author By : Amandeep Gujral

मेरे शहर तुम इनसे नहीं मिलते तुम्हारे घरों के दरवाजे पास होकर भी पास नहीं होते कहाँ बतियाते हो सीढ़ियों पर बैठकर घन्टों कहाँ धूप में खिलखिलाते हो कहाँ बरसते…

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विस्तार

Author By : Divya Saxena

विस्तार    अंतर्मन का विस्तार तुम में भी है मुझमें भी है प्रेम तुम्हें भी प्रखर है और मुझे भी है, इसकी थाह कितनी है? कुछ पता नहीं है और…

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बुरा न मानना ।

Author By : vivek chaturvedi

बुरा  न  मानना  कि  हम  गले  नहीं लगते सुनो  मेरी  भले  हैं  हम  भले  नहीं  लगते।।   है हाल अब गुलों का, जब से छोड़ा भौरौं ने वो खिलते हैं…

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“एक प्रेम ऐसा भी”

Author By : Harshita Yadav

बात ना राधा मीरा रुक्मणी, और न ही हीर- रांझा की है, बात तो सिर्फ प्रेम में, कंठ तक डूब जाने की है! - हर्षिता🌻 @harshita0551 (twitter)

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बन जाता है परचम- श्रुतिका साह

Author By : Shrutika sah

तेरे बदन से कुछ विमुक्त हो तो रुक मत तेरी रूह से कुछ रिक्त हो तो झुक मत चौकोर से चिथड़े से भी तो अलग होता है कपड़ा रूप दिया…

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दरवाजे- पुरोहित”निशान्त”

Author By : Nishant Purohit

दरवाज़े. घुटन है अंगना तुम्हारे, पर्दों को खुल जाने दो... आसमां नज़र आने दो।।   सूर्य की किरणों का तेज, कभी बारिश को इसे भिगाने दो.. ज़रा आँगने तक आने…

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मुझे मोहब्बतों में बर्बाद होना है…

Author By : Dr Afsar Safar

उसे यक़ीन है मुझे मोहब्बतों में बर्बाद होना है...। उसे ख़बर है मुझे हो ना हो सिफ़र होना है...।।   यूँ तो मुद्दतों उसे मेरी याद नहीं रहती...। और पल…

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ग़ज़ल: कोई सफ़र- अभिषेक नायक

Author By : ABHISHEK NAYAK

चलो फ़िर चले क़िसी सफ़र पर, कोई  नज़ारा मिले थोड़ा  सा  फ़ायदा  हो और बहुत  ख़सारा मिले!   बैठ कर जहाँ पूरी करू, इस अधूरी पड़ी कहानी को इक़्तिजा है…

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कविताऐं- भारद्वाज दिलीप

Author By : भारद्वाज दिलीप

1.एकांत का मन  •••••••••••••••   मेरे हो तुम मन तुम्हारे कहां थे   मुझे याद है वो जमाने की बात है तुम्हारा याद रखना और बातें करना    अगर  बंद…

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साहित्य तक!!

Author By : Shrutika sah

सभ्यता....... से प्रचुर समाज में सहजता की खोज पर निकले....... दो असहज से प्रेमी पहुँच जाते है, साहित्य तक!!   श्रुतिका साह

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ईश्वर कण कण में व्याप्त नहीं है

Author By : Rupesh Chaurasia

ईश्वर कण-कण में व्याप्त नहीं है ________________________   उस गली में ईश्वर नहीं रहता है, जिस गली से गुजरती है अकेली लड़की.. ईश्वर भाग खड़ा होता है वहां से जहां…

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सायोनारा- पियूष तिवारी

Author By : Piyush Tiwari Tiwari

उदास लड़के डरो कि बदल जाएगा एक दिन तुम्हारा अकेलापन अवसाद में अजगर की तरह निगलता लगेगा सूनापन त्यागना विचार के तकिए पर सिर रखकर सोने का विचार ताकि बच…

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“ मैं एक अपराधी कवि हूँ ”- विवेक शुक्ल

Author By : Vivek Shukla

जितनी देर में मैंने लिखी प्रकृति पर एक कविता मैं लगा सकता था एक पौधा मैं एक अपराधी कवि हूँ वे पथिक करें मुझपर मुकदमा जिनके पथ को बनाया है…

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नज़्म: “आवारा”- मजाज़ लखनवी

Author By : JIPL

नज़्म: "आवारा"   जगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँ ग़ैर की बस्ती है, कब तक दर-ब-दर मारा फिरूँ ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ, ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ।   झिलमिलाते कुमकुमों की,…

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इंतज़ार- Abhishek Nayak

Author By : ABHISHEK NAYAK

लोहे से  पक्के हो इरादे, वहीं  इज़हार करता हूँ! मैं  मिट्टी  पर नही  बारूद पर एतबार करता हूँ!   मल्लाह की ज़रूरत होती है , होती होंगी किसी को मैं…

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किश्तों में ज़िंदगी अपनी- Govind Ojha

Author By : Govindprasad Oza

आँखों में चुभते हैं कई अजीब प्रश्न इन दिनों मेरी अभिशप्त आँखें और ये आवारा सपने आहटें अजीब और उनकी परछाइयां लगभग उलझे हुए आदमी की शक्ल वाले संबंधो के…

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रत्नगर्भा याद करती होगी- Shrutika Sah

Author By : Shrutika sah

धरा याद करती होगी गिरे हुए वृक्ष के शिखर से भू चुम्बन के वक़्त उसके सृजन को! धरा याद करती होगी कोपलों के अंतिम श्वसन को देख उनके सृजन हेतु…

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संवाद- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

-संवाद-   पहाड़ के जंगल में देवदार के बहुत से पेड़ बहुत दिनो बाद मिले हालाँकि ये बहुत दिनों की गिनती मेरे लिए थी उनके लिए नही उन्होने तो सदियों…

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Hasratein-Ashish

Author By : आशीष डाबी

तमाम कोशिशों के बावजूद यह जो दिल धड़कता है कमाल धड़कता है   - आशीष

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ग़ज़लें- Om Awasthi

Author By : Om Awasthi

ग़ज़ल -1   ख़ुशबू काँटों से इन आँखों से नशा लेते है हम शजर काट के पंखे से हवा लेते है।   ज़ेहन में रखते है हम ख़्याल तर ओ…

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रचना: करीब आओ- सुनील उपाध्याय

Author By : Sunil Upadhyay

करीब आओ कुछ यूं के तुम्हारे लबों पर रखी वो शबनम की बूंदे मेरे पूरे हयात को सुकून दे जाएं, करीब आओ कुछ यूं के क़तरे में बिखरी मेरी ज़िन्दगी…

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कुछ नमक हराम नेता संसद में देखे जाते हैं…

Author By : Dr Afsar Safar

अब गली-गली घर-घर  मज़हब देखे जाते हैं...! कैसे लड़ाएँ किससे-किसको , ये ख़्वाब देखे जाते हैं...!!   टोपी और टीके की दोस्ती से नफ़रत है इनको...! ऐसे कुछ नमक हराम…

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ग़ज़ल: मेरे बदन पे था कभी उस के बदन का पैरहन आज बला का हिज्र है जिस्म पे शाल भी नहीं- सुनील जश्न

Author By : Sunil Jashn

ग़ज़ल -5   अब तो दिल ओ दिमाग़ में कोई ख़याल भी नहीं अपना जुनून भी नहीं उस का जमाल भी नहीं।   उस से बिछड़ के ज़ीस्त में ये…

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ग़ज़ल: एक खुदा है जो महज गुफ्तगू में है मौजूद और उसी से ये गुमां है कि खुदा खैर करे- सुनील जश्न

Author By : Sunil Jashn

ग़ज़ल -4   हाय वो याद कहाँ है कि खुदा खैर करे दिल में फिर अम्नो अमां है कि खुदा खैर करे।   एक खुदा है जो महज गुफ्तगू में…

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ग़ज़ल: वो लोग इश्क़ के सहरा में तिश्ना-लब ही रहे जो लोग रेत को पानी नहीं समझ पाए- सुनील जश्न

Author By : Sunil Jashn

ग़ज़ल -3   है रखनी कितनी रवानी नहीं समझ पाए जवान लोग जवानी नहीं समझ पाए।   वो लोग इश्क़ के सहरा में तिश्ना-लब ही रहे जो लोग रेत को…

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ग़ज़ल: हम आएंगे तो साथ उदासी भी लाएंगे तुम देख लो के उतनी जगह है भी या नही- सुनील जश्न

Author By : Sunil Jashn

ग़ज़ल -2   सब कुछ बनाने वाला बना है भी या नहीं हमको ये जानना है ख़ुदा है भी या नहीं।   जिसने ज़माने भर से जुदा कर दिया हमें…

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ग़ज़ल: कोई एहसास ए तमन्ना नहीं रहने वाला इश्क में कोई कहीं का नहीं रहने वाला- सुनील जश्न

Author By : Sunil Jashn

ग़ज़ल -1   कोई एहसास ए तमन्ना नहीं रहने वाला इश्क में कोई कहीं का नहीं रहने वाला।   इसको मंजूर है सहराओँ में रहना लेकिन दिल तेरे दिल में…

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रचना: “बेरोजगार”- सत्यम तिवारी

Author By : SATYAM TIWARI

  देर रात घर आना एक समस्या है देर रात भी घर न आना एक बीमारी हम अजीबोगरीब बीमारियों के शिकार थे हमसे शायद गंध आती थी या बास लोग…

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एक प्रेम कविता के नाम पर- सत्यम तिवारी

Author By : SATYAM TIWARI

परिभाषित करना सीमित करना है (ऑस्कर वाइल्ड) उसमें सबकुछ है, प्रस्तावित शब्द को छोड़कर ऐसा दुराग्रह कि प्रेम ही मर गया इतना सीमित किया परिभाषाओं ने रबड़ की तरह होता…

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रचना: “गाँव मे कवि”- अनिल अबूझ

Author By : अनिल अबूझ

गांव में कवि   जबसे खबर फैली गाँव में गाँव का एक लड़का कवि हो गया है चौकने हो गये सब गामड़ कानाफूसी चलने लगी छुक-छुक रेल सी अच्छा भला…

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रचना: “विकल्प”- अनिल अबूझ

Author By : अनिल अबूझ

विकल्प   गर्दन झुकाए झोला लटकाए सड़क पर जाता वह आदमी भी उठा सकता है कस्सी, गैंती, दरांती और फावड़े की जगह लट्ठ, तलवार और लोहे की रॉड दस किलो…

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देश की रिपोर्ट- अनिल अबूझ

Author By : अनिल अबूझ

देश की रिपोर्ट   अनिश्चितताओं के घनेरे बादलों से घिरा आसमां दुश्चिंताओं के स्याह घेरे लिये आँखें अबोध चीखों से गुंजायमान देश सरकारी चुप्पियां प्रशासनिक बहरापन फोर ए चेंज हम…

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दिल्ली से डरता है कवि- अनिल अबूझ

Author By : अनिल अबूझ

दिल्ली से डरता है कवि   गाँव के एक कोने में बैठा कवि रचता है शब्दों का संसार निचोड़ता है दिनोंदिन सूखती जा रही मिट्टी को नीरता है डांगरों को…

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भुलक्कड़ देश- अनिल अबूझ

Author By : अनिल अबूझ

भुलक्कड़ देश   भूल जाता है मजदूर दिनभर का शोषण शाम को पव्वे के साथ दो रोटी सामने आते ही भूल ही तो जाता है बेरोजगार अपनी बेरोजगारी किसी पार्टी…

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ग़ज़ल: तुम्हारा साथ पाकर लग रहा है मेरे हाथों ख़जाने लग गए हैं- Bhaskar Shukla

Author By : Bhaskar Shukla

हुनर अपना दिखाने लग गए हैं ग़ज़ल कहने सुनाने लग गए हैं   नहीं आसान थी मंज़िल हमारी पहुँचने में ज़माने लग गए हैं   तुम्हारा साथ पाकर लग रहा…

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ग़ज़ल: शोर में आवाज़ मुदग़म क्यों करें कर रहे हैं जो सभी हम क्यों करें- Bhaskar Shukla

Author By : Bhaskar Shukla

शोर में आवाज़ मुदग़म क्यों करें कर रहे हैं जो सभी हम क्यों करें   सरफ़रोशी की तमन्ना है हमें ज़ुल्म के आगे नज़र ख़म क्यों करें   रौशनी के…

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ग़ज़ल: तुम चाहतों वाले कभी ख़ुश हो कभी दुखी हम इश्क़ वाले लोग हैं हर दम उदास लोग- Bhaskar Shukla

Author By : Bhaskar Shukla

रखते अगर्चे आँख को हैं नम उदास लोग अश्कों में ज़ाया करते नहीं ग़म उदास लोग   चलता रहेगा जश्न-ए-उदासी तमाम शब हैं मुद्दतों में आज फ़राहम उदास लोग  …

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ग़ज़ल: मैं वो हूँ जो फ़रहाद का तेशा करू हूँ तेज़ मैं वो भी हूँ जो क़ैस को वहशत उधार दूँ- Bhaskar Shukla

Author By : Bhaskar Shukla

ख़्वाहिश है इन गुलों को दवामी बहार दूँ जितने किये हैं इश्क़, सुख़न में उतार दूँ   वैसे तो उसका नाम नहीं हाफ़िज़े में अब मुमकिन है रूबरू जो कभी…

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ग़ज़ल: एक नज़र में लुट गया है दिल सरापा एक ही चाबी से घर भर खुल गया है- Bhaskar Shukla

Author By : Bhaskar Shukla

जिस किसी पर भी तेरा दर खुल गया है ये समझ लीजे मुक़द्दर खुल गया है   क्यों तलाशें राह बाहर की कोई जब रास्ता अंदर ही अंदर खुल गया…

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रचना: “लड़कियों”- Ritu Singh

Author By : Ritu Singh

  लड़कियों , अच्छी हो तो बनी रहो, बुरी हो तब भी बनी रहो पर मत लादना कभी खुद पर बहुत अच्छी होने का बेतुका ,अनचाहा बोझ । ये बोझ…

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प्रेम- हर्षिता पंचारिया

Author By : Harshita Panchariya

१) जब जब भी मैं दोहारती रहती हूँ कि मुझे तुमसे प्रेम है, मुझे तुमसे प्रेम है.... तो दरअसल मैं कहना चाहती हूँ एक ही इंसान से बार बार प्रेम…

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ईश्वर और प्रार्थनाएँ- हर्षिता पंचारिया

Author By : Harshita Panchariya

१) प्रार्थनाएँ कितनी बार ईश्वर तक पहुँची, मैं, ये तो नहीं जानती । परंतु हर बार हाथ जोड़ने के बाद.... हथेली देखकर ऐसा लगता है कि ... इन रेखाओं के…

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रचना: “संबंधो के रंग”- हर्षिता पंचारिया

Author By : Harshita Panchariya

जब मुझे पहली बार प्रेम हुआ तो, मेरे प्रेमी के पहले स्पर्श से मेरे गाल “गुलाबी” हो गए...... इस गुलाबी रंगत के चटकारे प्रेमी से अधिक.... मोहल्ले की उन ख़ाली…

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रचना: “प्रतीक्षित स्त्रियाँ”- हर्षिता पंचारिया

Author By : Harshita Panchariya

कितनी निष्ठुर हो गई हो तुम ! तुम्हें नहीं लगता कि... तुम्हें ओढ़ लेना चाहिए समय का लबादा !! और छुप जाना चाहिए किसी घुप्प अंधेरे बियाबान में !!!  …

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रचना: “इलाज”- हर्षिता पंचारिया

Author By : Harshita Panchariya

कुत्ते के काटने का इलाज है, साँप के काटने का इलाज है, पर मनुष्यों के काटने का कोई इलाज नहीं बना.... दुनिया के तमाम विज्ञानियों और शोधार्थियों को... इसका भान…

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मेरी ज़िंदगी मुझे सवाल सी है…

Author By : Dr Afsar Safar

तुमसे मोहब्बत मुझे कमाल की है...। मेरी जिंदगी मुझे सवाल सी है...।।   इक घर की जिम्मेदारीयां बहुत हैं...। ऊपर से ये बेरोजगारी बवाल सी है...।।   लिखता हूँ तुझे…

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अभी बाकी था- Shrutika Sah

Author By : Shrutika sah

मेरी उंगलियो पर रंग छोड़ गए उस लाल शहतूत का तुम्हारी सफेद पोशाक को रंगदेना अभी बाकी था! मानसून की पहली बारिश में भीगी तुम्हारीं अञुलि में महकती मिट्टी का…

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भलाई की खोज- जीतेन्द्र मीना

Author By : Jitendra Meena

एक दिन घर से निकला भलाई शब्द की खोज में एक छोटे से कोने से बडे शहरों तक खोजा । खोज मे दिन-रात लगा मगर कुछ हाथ ना लगा भटकता…

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ग़ज़ल: वहाँ जब तक रहे तब तक यहाँ की फ़िक्र रहती थी यहाँ जब आ गए हैं तो वहाँ की याद आती है- Ashu Mishra

Author By : Ashu Mishra

ग़ज़ल -5   जहाँ से  आ गए हैं  उस जहाँ की याद  आती है के हम उरियाँ-सरों को सायबाँ की याद आती हैै   जहान-ए-महफ़िल-ए-शब में सभी आँखें भिगोते हैं…

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ग़ज़ल: तू चाहता है मुसाफ़िर अगर उदास न हो तो देख राह का कोई शजर उदास न हो- Ashu Mishra

Author By : Ashu Mishra

ग़ज़ल -4   तू चाहता है मुसाफ़िर अगर उदास न हो तो देख राह का कोई शजर उदास न हो   मैं इस लिए भी तबस्सुम सजाये फिरता हूँ कि…

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ग़ज़ल: क़रीब आ के सभी दोस्त गुम नहीं होते किसी किसी को मेरा नाम रट भी जाता है- Ashu Mishra

Author By : Ashu Mishra

ग़ज़ल-3   ख़सारे होते हैं सामान घट भी जाता है दिलों के काम में सिक्का पलट भी जाता है   क़रीब आ के सभी दोस्त गुम नहीं होते किसी किसी…

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ग़ज़ल: तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी – Ashu Mishra

Author By : Ashu Mishra

ग़ज़ल -2   जो पर्दा-दारी चली तो यारी नहीं चलेगी हमारी दुनिया में दुनिया-दारी नहीं चलेगी   तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे फिर इस सड़क पर कोई…

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ग़ज़ल: दिलों में घाव दिये आँखों में बहाव दिया हवा-ए-हिज्र ने हर शाख़ को झुकाव दिया- Ashu Mishra

Author By : Ashu Mishra

ग़ज़ल -1 दिलों में घाव दिये आँखों में बहाव दिया हवा-ए-हिज्र ने हर शाख़ को झुकाव दिया   उस आफ़ताब ने इक रोज़ मेरी नज़्म पढ़ी और उसके बाद बहुत…

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मैं हिन्दी हूँ- Karan Nimbark

Author By : Karan Nimbark

मैं भाषा हिन्दी हूँ सरल हूँ पर साधारण नहीं कश्मीर से कन्याकुमारी तक मौजूद हूँ तो अकारण नहीं संसद से संस्कृति तक के अस्तित्व में मैं हूँ मेरे साथ चलने…

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रचना: “पूरी ईच्छा है”- करन निम्बार्क

Author By : Karan Nimbark

राम नाम भजने की आज पूरी ईच्छा है यह तो मन का राम ही जाने कितनी जरूरी ईच्छा है भोग चढ़ाये,गीत गाये,बजाये हर साज है कैसे भी पूरा करना राम…

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रचना: “मोटी परत है”- करन निम्बार्क

Author By : Karan Nimbark

पुस्तकों के भार से ना हटेगी यह थोड़ी मोटी परत है नए लोगों के विचार से भी ना हटेगी यह थोड़ी मोटी परत है बच ना सकेगा कोई कूनबा क़स्बा…

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रचना: “कैसी मुश्किल में खड़े हैं”- करन निम्बार्क

Author By : Karan Nimbark

समाज,रस्मों रिवाज के बंधन में पड़े हैं ये दुनिया वाले कैसी मुश्किल में खड़े हैं बचपन में भगवान बसता है लेकिन बचपन से ज्यादा ठेकेदार बड़े हैं उसका अपराध यह…

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रचना: “मैं आजकल” – करन निम्बार्क

Author By : Karan Nimbark

मैं आज तुमसे एक विश्वासघात करूँगा नित नए झूठ गढ़ता हूँ पर तुम्हें झूठ बोलने से रोका करूँगा । की है मैंने भी कई बार हत्या मानवता की लेकिन समाचार…

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रचना: “अकेली औरतें”- नीना अन्दोत्रा पठानियाँ

Author By : नीना अन्दौत्रा पठानिया

अकेली औरतें जो औरतें अकेली रहती हैं । दुनिया के कितने , तंज सहती हैं । हर सवालिया नज़र उनको घूरती है । क्यों, क्या, कैसे के किस्से अक्सर उनके…

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तुम प्रेम नही आस्था हो- नीना अन्दोत्रा पठानियाँ

Author By : नीना अन्दौत्रा पठानिया

तुम प्रेम नहीं आस्था हो बिल्कुल ऐसे जैसे होती हर किसी को अपने आराध्य पर कह दूं तुम्हें आराध्य तो अत्यधिक न होगा अदृश्य शक्ति बन साथ-साथ चलने लगे हो…

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रचना: बुद्ध – नीना अन्दोत्रा पठानियाँ

Author By : नीना अन्दौत्रा पठानिया

बुद्ध   तुम बुद्ध बन गए दे गए दुनिया को ज्ञान भक्ति में लीन होकर तुम्हे क्यों नहीं दिखी यशोधरा की सजल आँखें क्यों विचलित नहीं हुए तुम एक भी…

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रचना: “दर्द” – आफ़िया

Author By : Afiya Bano

कुछ लोगों का दर्द इतना ख़ामोश होता हैं जैसे शाखों पर हरे पते चुपचाप से पीले पड़ जाते हैं औऱ फिर एक दिन समा जाते हैं जमीं में    …

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रचना: “कहीं था”- रश्मि वैष्णव

Author By : Rashmi Vaishnav

.....कहीं था ! ********** शिकवा थी किसी से, पर रहम भी कहीं था कहने को कई अपने, पर दुश्मन भी कहीं था कहीं धन के लिए लड़े, कहीं मन के…

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हम खुद को तवायफ बना बैठे- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

जिस्मों की लज्जतों से हासिल कुछ ना हुआ...। भरे बाजार हम खुद को तवायफ़ बना बैठे...।।   इश्क़ की सौदेबाज़ी इकतरफ़ा बेहतर थी शायद...। जिस्मों के नशे से हम रूहों…

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रचना: “फ़ुटपाथ”- मधु शुभम पांडे

Author By : मधु शुभम पांडे

खुला आसमां और बर्फ़ीली हवायें, वो मासूम खुले में कहीं भी सो जाते हैं।। नहीं है पास उनके मख़मली बिछौने,न गर्म रजाई में वो खुद को छुपाते हैं।। मिल जाता…

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अश्आरों से सबकी कहानी लिखते हैं- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

अश्आरों से सबकी कहानी लिखते हैं...। हम शायर हैं हरफों में इश्क़ की रवानी लिखते हैं...।।   है बहुत यहाँ चेहरों पर नकाबों का मौसम...। हम चेहरे में छिपे चेहरों…

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वफ़ा का उसूल आया है- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

मेरे हिस्से में वफ़ा का उसूल आया है...। आज़ मेरे ख्वाबों में मेरा रसूल आया है...।। तुम्हें खौफ़ है जानां गुलाब के कांटों से...। यहाँ हिज्र में मिलने मुझसे बबूल…

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रचना: “स्वार्थी दुनियां”- मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

अपने हजारों अवगुण छुपा लेंगे।। दूसरों का खूब तमाशा बनाते है लोग।। कब किसको कहाँ नीचा दिखा दें।। हर समय ऐसी वजह ढूंढ़ते है लोग।। गरीबों को देख गाड़ियों के…

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रचना: “फ़ागुन”- मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

टेसू ने केसरिया रंग से, मौसम को कर दिया सुहाना,, बासन्ती की अगुवाई ने,माघ मास को किया रवाना।। सुनहरी चादर खेतों में,फसलें अब लहराने लगी,, हो रहा मौसम सतरंगी,आमों में…

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रचना: “रंग” – मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

गगन का नीला,अवनि का धानी इंद्रधनुष सतरंगी रंग।। सुख दुःख के हैं रंग निराले सपनों के अतरंगी रंग।। सच्चा हो गर चाहत का रंग,प्रेम प्रसून खिल जाता है।। गोरी राधा…

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बेटियों की दशा- मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

  डरती है एक बेटी की माँ ,पैदा बेटी करने से। हवस के भूखे हैवानों के, हाथ कुचलकर मरने से। नन्ही नन्ही कलियों को, खिलने से पहले मसल दिए। क्या…

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प्रेम- पुरोहित”निशान्त”

Author By : Nishant Purohit

प्रेम रोग नहीं जोग है प्रेम वियोग नहीं संयोग है प्रेम क्षणिक नहीं शाश्वतहै प्रेम ग्रस्त नहीं मुक्त है प्रेम दुर्भाग्य नहीं सौभाग्य है प्रेम रोग नहीं जोग है  …

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अर्पण- पारुल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

अर्पण   हो चुकी छिन्न-भिन्न अर्पण कर सर्वस्व , नहीं शेष अभिलाषा कोई कतरा कतरा भी संजोए अहमियत मेरी..... भीषण गर्मी की तपती दोपहरी में मैंने छुपाई आंचल में माथे…

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कहानी – औरत बच्चा पैदा करने की मशीन नही- पारुल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

औरत बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं     हिमानी जल्दी से तैयार होकर नीचे आ जाओ। आज तुम्हारी डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लग गया है। अरे बेटा आकाश! आज डॉक्टर…

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वार्तालाप- पारुल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

*वार्तालाप*   आज कुछ पुस्तकों को बतियाते देखा वो मोटी वाली जो सबसे ऊपर पड़ी थी बोली पतली से... मुझे तो नित्य ही धूप, हवा और कोमल स्पर्श की गर्माहट…

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कविता – लड़कियाँ – पारूल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

बेल सी होती हैैं लड़कियाँ हठात पाती है अवलंब मजबूत कंधों का... लिपटकर ताउम्र बढ़ती ही जाती... काई लगी दीवार या सड़न उठती गलियाँ... या टूटा छप्पर आंधी हो या…

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इश्क़ के मारे दिन रात रोते हैं- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

बेसबब, बेहिसाब रोते हैं...। इश्क़ के मारे दिन - रात रोते हैं...।।   ये मोहब्बतों का सफ़र है...। ये दीवाने चुपचाप रोते हैं...।।   अब परिन्दे थक गए हैं सफ़र…

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गुलाबों को हम हवा में उड़ाएँगे…

Author By : Dr Afsar Safar

किसको आखिर अब हम क्या बताएंगे...। तेरे सूखे गुलाबों को अब हम हवा में उड़ाएंगे...।।   तुम खुश हो ना छोड़ कर मुझको...। बंद कमरों में अब हम कहकहे लगाएंगे...।।…

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कोशिश है मै खुद को जानूं- जीतेन्द्र मीना

Author By : Jitendra Meena

  कोशिश है मै खुद को जानू भीड मे खुद को पहचानू , लोग जाने मुझे करीबी से ये रिश्ता मिटे गरीबी से । कोशिश है मै खुद को जानू…

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तुम आए हर घटना के घटित होने के बाद- श्रुतिका साह

Author By : Shrutika sah

  तुम आए इस कहानी मेंजै से आता है, अंतिम श्लोक के बाद कोई नया अध्याय!! तुम आए इस देह में जैसे आता है, हृदय की हर हलचल के बाद…

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उदासियों की स्मृतियाँ- विवेक चतुर्वेदी

Author By : vivek chaturvedi

उदासियों की स्मृतियाँ सिर्फ दुःख वाले दिनों में आती हैं लेकिन, सुख से भरे दिनों में हम उदासियों को अपने स्मृतियों में आने ही नहीं देते हमारे जीवन में दुःख…

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रचना: “छांव”- डॉ. पृथ्वीराज सिंह

Author By : डॉ पृथ्वी सिंह

छांव   छांव हूँ में, निर्विवाद, निष्कलंक, शुकून देने वाली। जहाँ साफ़, सपाट तपती सड़क पर, कोई ठहरता भी नहीं, लेकिन दौड़ आता है सरपट, मेरे काँटों वाले पेड़ की…

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एक दोस्त ऐसा भी हो- डॉ. पृथ्वीराज सिंह

Author By : डॉ पृथ्वी सिंह

एक दोस्त ऐसा भी हो दोस्त होते हैं वे, जिनमें आपस में ‘दो’ ना हो। यह तो जीवन का सुखद पहलू है, सभी चाहते हैं पाना इसे, लेकिन ज़िंदगी में…

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परिपक्व स्री- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

परिपक्व स्त्री नहीं हो सकती कभी भी चांद के समान पुरुष से प्रभावित एक परिपक्व स्त्री, उसे नहीं भाँती मन की चँचलता बाहरी सुंदरता नहीं समझ आता उसे चाँद सा…

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दिव्य प्रेम- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

दिव्य प्रेम यह प्रेम ही तो है जो जल मार्गी होकर तारता तृप्त करता, वह वायु मार्ग से आगमन करता और होंसलों को उडा़न देता, प्रेम होता अग्नि के पिण्ड…

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उत्कृष्ट भूल- श्रुतिका साह 

Author By : Shrutika sah

मैं चाहती हूँ तुम सँग प्रेम में कोई भूल ऐसी करुँ जो उत्कृष्ट हो, मनमोहक हो, सरल हो, सुंदर हो, जैसे बादलों में रंग ना भर सकने की  भूल की…

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देश देखो श्मशान कर दिया…

Author By : Dr Afsar Safar

इक फकीर की तलब़ ने बर्बाद कर दिया...। हँसता खेलता देश देखो श्मशान कर दिया...।।   ये दौर है हर तरफ मौत के मातम का...। फकीरी की हवस ने मुल्क…

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रचना: कल तो आएगा- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

कल तो आएगा फर्ज़ करो, कि बस इक आखिरी दाँव और खेला जाना है, कि बस एक आखिरी शेर और लिखा जाएगा, कि बस इक आखिरी दिन बचा है, सूरज…

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रचना: “आदमी”- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

आदमी   आदमी बना सकता है एक नया धर्म खड़ी कर सकता है अक्षौहिणी सेनाएं बना सकता है बडे बड़े महल, अट्टालिकाएं और मूर्तियां मार सकता है किसी को भी…

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हर शख़्स खुद को खुदा कर रहा है- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

हर शख़्स खुद को खुदा कर रहा है...। आज  आदमी, आदमी से डर रहा है...। कोई दिल खोलकर बोले भी तो किससे...। आज हर शख़्स रिश्तों के फायदे गिन रहा…

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मिलना- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

मिलना-   किसी से मिलना तो ऐसे मिलना जैसे मिलता है कोई आखिरी बार किसी से किसी से मिलना तो दिल से मिलना यदि सामने वाला मिले कभी दिमाग से…

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आज़ादी का मतलब क्या हैं- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

आजादी का मतलब क्या है?    जिन लोगो की जेब भरी है, जिन लोंगो का पेट भरा है जिनके आगे सिस्टम सारा चादर जैसा बिछा पडा है जिनके पास है…

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माँ- आशीष डाबी

Author By : आशीष डाबी

प्रेम सिर्फ़ प्रेमी-प्रेयसी का ही नही नही होता सिर्फ़ प्रणय का एक शाश्वत प्रेम तो होता हैं माँ औऱ उसके पुत्र/पुत्री का दुनियां के सभी स्नेह औऱ प्रेम के बन्धनों…

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भूख का व्यापार

Author By : कमलेश जोशी

फसलें कब क्या पैदा होंगी भूखा कब क्या खाएगा किसको कितना रेट मिलेगा यह भी वह बतलाएगा रबी ख़रीफ़ में क्या है अंतर जिसको यह मालूम नहीं खेती के हों…

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वादा कर तू लौट के ज़रूर आएगा

Author By : कमलेश जोशी

कितने दिन की छुट्टी आया है? माँ बस तुझसे मिलने आया हूँ मैं कब छुट्टी में रहा हूँ? हर वक़्त ड्यूटी पर रहा हूँ जिस्म घर लेकर आता हूँ रूह…

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पहाड़ों में अब दिल नहीं लगता

Author By : कमलेश जोशी

इन पहाड़ों में अब दिल नहीं लगता क्यों? पूछती हो तुम तो बताता हूँ तुम्हारी हँसी अब यहाँ नहीं गूँजती न इन फूलों से ख़ुशबू तुम्हारी झरती है ये नदियाँ…

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सुन्दरता- सैय्यद ताहा क़ादरी

Author By : Syed Taha Quadri

बस कंडक्टर की सीट के पास खड़ी वो पिन्क साड़ी मे लिप्टी हुई थी, उसके बाल उसके कान तक आते थे और वो उसे पीछे तक ले जाती, घुँघट उसके…

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आशुतोष राना और उनका ‘रामराज्य’- राजेन्द्र चन्द्रकान्त राय

Author By : JIPL

  आशुतोष राना और उनका ‘रामराज्य’   रामेश्वर भाई के दूसरे चचेरे भाई आशुतोष राना ने डाॅ सर हरिसिंह गौर विवि सागर से ग्रेजुएशन किया और अभिनय शास्त्र के शास्त्रीय…

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इक रोज़ मैं लौटूँगा

Author By : कमलेश जोशी

इक रोज़ मैं लौटूँगा शहर की दौड़ भाग से दूर अपने गाँव की ओर   शहरों में बढ़ती भीड़ के ख़तरे मशीन सी चलती जिंदगी फेफड़ों में जमा होता ज़हर…

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हे गंगे क्यों कुछ नहीं कहती

Author By : कमलेश जोशी

कल-कल बहती अविरल बहती हे गंगे क्यों कुछ नहीं कहती   सबका मैला हो तुम ढोती ख़ुद भी मैली होती रहती हे गंगे क्यों कुछ नहीं कहती   अंधाधुन्ध दोहन…

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मुझे मुश्किल में डाला जा रहा है- सय्यद ताहा क़ादरी

Author By : Syed Taha Quadri

मुझे मुश्किल में डाला जा रहा है मेरे दुशमन को पाला जा रहा है तुम अब तस्वीर से बाहर तो आओ कोई घर से निकाला जा रहा है हमीं हैं…

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रचना: औऱ अंत मेंं- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

और अंत में   याद नहीं उसने समन्दर को पहली बार देखा या समन्दर ने उसको लेकिन एक दूसरे को देखते ही दोनो मचल उठे वो किनारों की रेत को…

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युद्ध औऱ प्यार- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

युद्ध और प्यार    बहुत सारे व्यक्ति मिलकर युद्ध कर सकते हैं और अपने शत्रुओं को खत्म कर दुनियां के एक बड़े भूभाग को जीत सकते हैं हो सकता है…

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खेत चलकर खड़े हैं दिल्ली- Afsar Safar

Author By : Dr Afsar Safar

 खेत चलकर आज खड़े हैं दिल्ली...। क्या ये फसल नहीं है खुद्दारी की...।।   तुझे बहुत फिक्र है हाँ में हाँ मिलाने की...। ये सरकार तैयार है देश को बेच…

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आँखों की नमीं

Author By : Divya Saxena

आँखों की नमीं   बहुत कुछ बयाँ करती है आँखों की नमीं ये तो पढ़ने वाले ही समझते है इसकी गहराई सुनामी की आहट देती हुई हलचल मचा देती है…

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सुनो उसे मेरा साथ पसंद है…

Author By : Dr Afsar Safar

सुनो उसे मेरा साथ पसंद है...। हाथों में उसके मेरा हाथ पसंद है...।।   खुशबुओं से रोशन है बदन उसका...। उसे मेरे बदन का अहसास पसंद है...।।   गुलाबों सी…

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रचना: विस्तार- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

विस्तार    अंतर्मन का विस्तार तुम में भी है मुझमें भी है प्रेम तुम्हें भी प्रखर है और मुझे भी है, इसकी थाह कितनी है? कुछ पता नहीं है और…

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इत्तेफाक- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

इत्तेफाक   वो सहर वो शाम नहीं आई वो खूबसूरत ख्वाबों वाली चंदनी रात नहीं आई, भागती रही जिंदगी रेस के मैदान पर सुकून से बैठ सके संग में दोनों…

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वो शख़्स मेरा था, मेरा है और मेरा ही रहेगा- Afsar safar

Author By : Dr Afsar Safar

वो शख़्स मेरा था, मेरा है और मेरा ही रहेगा...। वो रहेगा दूर मगर हर हाल में बावफ़ा ही रहेगा...।।   मलाल जुदाई का यूं तो बहुत हैं उसको...। मगर…

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रचना: आत्म प्रबंधन- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

आत्म प्रबंधन   बैठ गया ये मन जब आंदोलन पर अड़ गया वो जिद पर इस चाहत में कि बदलाव तो लाना हैं कैसे भी प्रक्रियाओं में मस्तिष्क और हृदय…

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रचना: मोह और प्रेम- दिव्या सक्सेना

Author By : Divya Saxena

मोह और प्रेम   प्रेम से भरा हृदय आघात गहरे सहता हैं मगर फिर भी उसे मौन रहकर सितम सारें झेलना ही होता हैं जब वो ये सब झेलता हैं…

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रचना: अपने जीवन में- सुभाष तराण

Author By : सुभाष तराण

अपने जीवन में  -------------------------- अपने जीवन में तुम बहुत से लोगों से मिले होंगें लेकिन अभी भी बहुत से लोग हैं जो मिलना चाहते है तुमसे अपने जीवन में तुम…

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रचना: सच क्या हैं?- गुलशन कुमार

Author By : गुलशन कुमार

मैं तन्हा हूँ मगर इस भीड़ का हिस्सा हूँ ये जो वक़्त चले जा रहा है बिना रुके और ये मेरी लाखों ख़्वाहिशें जो शायद वक़्त से भी आगे दौड़…

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अकिंचन निवेदन- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

अकिंचन निवेदन हार में या जीत में, रुदन में या गीत में, लय में, संगीत में, मैं तुम्हारे साथ हूँ शत्रुता में, प्रीत में, भरे में या रीते में, भविष्य…

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कविता: लाश – विवेक शुक्ल

Author By : Vivek Shukla

एक लाश इसलिए लाश है क्योंकि उसमें कोई गतिविधि नहीं होती वो न कुछ बोल सकती है न ही विरोध कर सकती है उसके साथ चाहे जो करो कोई प्रतिक्रिया…

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अगली मुलाकात तक- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

अगली मुलाकात तक अच्छा अब चलता हूँ, और अगली मुलाकात तक, रास्ता तुम्हें हमेशा साफ मिले, लिखने बैठो तो हर्फ़ खुद मिलें, दुरुस्त अलिफ़ मिले, ख़ालिस शीन क़ाफ़ मिले अगली…

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रचना: खाली पन्ने- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

  खाली पन्ने ज़रूरी नहीं कि कॉपी के हर पन्ने के हाशिये तक लिखा जाए ज़रूरी नहीं कि हर हर्फ़ के ऊपर छतवाली लकीर खींची ही जाए, ज़रूरी नहीं है…

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रचना: प्रेम- विवेक चतुर्वेदी

Author By : vivek chaturvedi

  जब-जब हत्याएँ होती है प्रेम की जब-जब प्रताड़ित किया जाता है प्रेम को तो प्रेम चिल्लाता है हृदय के सामने जैसे कोई आदमी चिल्लाता है पहाड़ के सामने और…

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मै तो आख़िर इश्क़ हूँ- Afsar safar

Author By : Dr Afsar Safar

  मैं तो आखिर इश्क़ हूँ। जब भी पुकारोगे जवां हो जाऊंगा।।   फ़रेब दे कर मैं तेरे जिस्म से खेलूँ.। क्या कहती हो, जीते जी मर जाऊंगा।।   अगर…

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मोहब्बत के महीने- Afsar safar

Author By : Dr Afsar Safar

  मोहब्बतों को महीने में बांटते हैं कुछ लोग। मोहब्बतों में तमाम उम्र गुजारते हैं कुछ लोग।।   गुलाबों को रश़्क हैं हुस्न पर अपने। इश्क़ की खातिर यहां दर…

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रचना: प्रेम बादल- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

प्रेम बादल एक बात तो बताओ ज़रा, जब जब बादल बरसते हैं, उस दिन तुम और भी ज़्यादा, क्यों यादों में घुमड़ते हो, काले बादलों की तरह, शायद इसलिए, क्योंकि,…

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रचना: छत पर चिड़िया- आभा श्रीवास्तव

Author By : आभा श्रीवास्तव

"  छत पर चिड़िया "   अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो, अम्मा थोड़े चावल दो। चिड़िया छत पर आई है, भूखी है, घबराई है। थोड़े चावल खाएगी, थोड़े से ले जाएगी।…

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रचना: नई सुबह- डॉ. पृथ्वीराज सिंह

Author By : डॉ पृथ्वी सिंह

नई सुबह   ठंडी ताज़ी हवा से शुरू होकर, हल्की गुनगुनी धूप लिए, तमस को मिटाकर, आशा की आभा लिए, चीत्कार करती सृष्टि, और मेरे जैसे पीड़ितों को समझाने के…

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रचना: अन्त- आभा श्रीवास्तव

Author By : आभा श्रीवास्तव

'अन्त'           छल फरेब की         झूठ कपट की         गठरी कितनी भारी है।         अब लगता…

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कविता का वादा- आभा श्रीवास्तव

Author By : आभा श्रीवास्तव

' कविता का वादा '   जीवन अद्भुत साँसें अद्भुत धरती अद्भुत, नभ भी अद्भुत, सुख दुःख, आँसू, प्यार सभी कुछ अद्भुत है । लेकिन मेरी नन्ही कविता सबसे अलग,पृथक,…

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कविता: तन्हाई- डॉ. पृथ्वीराज सिंह

Author By : डॉ पृथ्वी सिंह

  तन्हाई समंदर के किनारे रेत पर, कभी न लिखा तेरा नाम मेरे नाम के साथ, लहरों से मिटने के डर से। मेरे बग़ीचे का गुलाब भी खिला था कभी…

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एक उदास दोपहर- आभा श्रीवास्तव

Author By : आभा श्रीवास्तव

" एक उदास दोपहर "                    जेठ महीने की                   एक उदास दोपहर  …

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कविता: वो शहर- डॉ. पृथ्वीराज सिंह

Author By : डॉ पृथ्वी सिंह

वो शहर     वो शहर था मेरा, ज़रा उसका ख़याल रखना। ख़ूबसूरत झरोखों के इतर, एक छोटी सी खिड़की खुली रखना।। बस चुगने के लिए, निकलना पड़ा वहाँ से।…

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कविता: अनुरोध- आभा श्रीवास्तव 

Author By : आभा श्रीवास्तव

" अनुरोध "                  बादल          तुम बरसो इतना        बरसो तुम इतना बादल       कि…

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कविता: टूट गए बाबूजी- आभा श्रीवास्तव

Author By : आभा श्रीवास्तव

'  टूट गये बाबू जी  '  इतने दुखों को              कैसे सहे कोई ?              सहने की सीमाएँ    …

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खबर

Author By : Nimisha Agnihotri

आज कल आपकी कोई खबर नहीं मिलती न जाने क्यों हमको ही नहीं मिलती बेरूखी का सबब तो पता चले "निमिषा" बेवजह मोहब्बत में दूरियां नहीं बनती     •…

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कविता: “बोलो”- विवेक शुक्ल

Author By : Vivek Shukla

बोलो,   बोलो कि तुम्हारे बोलने से उन बेजुबां पक्षियों के घोंसले तबाह होने से बच सकें बोलो, बोलो कि तुम्हारे बोलने से मुंह मे जुंबा के होने का एहसास…

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कविता: “विरहणी”- • मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

कविता: विरहणी   जब से तुम संग प्रीत लगी है,अब न कुछ भी भाये जी।। पिय से मिलन की आस लगी है,पिय को टेर बुलाओ जी।। अखियां हैं दरसन की…

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कविता: “सरिता”- मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

कविता: सरिता   निर्मल सी बहती रहती हैं, जीवन की राह बताती हैं।। कल कल की ध्वनि गुंजारित कर,मधुर संगीत सुनाती हैं।। पर्वत का सीना चीर कर,स्वयं ही राह बनाती…

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कविता: शरद ऋतु आगमन- मधु शुभम पाण्डे

Author By : मधु शुभम पांडे

शरद ऋतु आगमन-   मनभावन सी भोर लगे ,हो रहा शरद ऋतु आगमन।। ऋतु शरद तुम्हारा अभिनन्दन है अभिनन्दन है  अभिनन्दन।। अवनि की छटा मनभावनी,ओस बूँदे मोती सी चमक रही।।…

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कविता: “हत्या”- राजीव तनेजा

Author By : राजीव तनेजा

"हत्या"   पढ़ना चाहता हूँ मैं... बड़े प्रेम और लगन से... मंत्रमुग्ध हो.. पन्ना दर पन्ना... तुम्हारे उजले...निष्कलंक..अतीत और... स्वाभिमानी वर्तमान का ताकि भविष्य में तुम्हारे... कभी मैं कर सकूँ...…

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भड़ास दिल की- राजीव तनेजा

Author By : राजीव तनेजा

"भड़ास दिल की कागज़ पे उतार लेता हूँ" क्या लिखूँ.. कैसे लिखूँ… लिखना मुझे आता नहीं… टीवी की झकझक.. रेडियो की बकबक.. मोबाईल में एम.एम.एस.. कुछ मुझे भाता नहीं भड़ास…

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कविता: “हश्र”- राजीव तनेजा

Author By : राजीव तनेजा

"हश्र"      जाने क्यों हर बार पिछली बार की ही तरह बार बार नकार दिए जाने के बावजूद मैं लौट आता हूँ फिर से उसी दर..उसी चौखट पे फिर…

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ईश्वर सुन रहे हो न- पारुल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

ईश्वर सुन रहे हो ना !      मैं तितली के परों पर कुछ ऋचाएं अंकित कर नौनिहालों के लिए संकलित करना चाहती हूं जुगनुओं को पहरेदार नियुक्त कर चांदनी…

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“नारी के उपनाम”- पारुल हर्ष बंसल

Author By : पारुल बंसल

नारी के उपनाम अनेक        जो मुस्कुरा के रह गई , तो मुंह में जुबान नहीं। जो चार शब्द ज्यादा बोल दी, तो जुबान कैंची की तरह चलाई…

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कविता: प्रेम प्रमेय- विकास राजौरा

Author By : विकास राजौरा विकास

प्रेम-प्रमेय मेरा मानस उसके भूगोल से परे नहीं जा सका, उसका ध्यान मेरे इतिहास पर तटस्थ रहा, कुल मिला कर अनुराग के बीजगणित के बीज, अंकुरित न हो पाए, और…

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कविता: मोह मोह के रेशे- नीना अन्दौत्रा पठानिया

Author By : नीना अन्दौत्रा पठानिया

मोह-मोह के रेशे ●●●●●●●●●● प्रेम वो पौधा नहीं जिसे रोप दिया ज़मीन पर वक़्त के साथ जो लहलहाने लगेगा प्रेम वो दूब है जिसे ज़रूरत नहीं रोप देने की ख़ुद-ब-ख़ुद…

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कविता: बुद्ध औऱ अशोक- आशीष डाबी

Author By : आशीष डाबी

अशोक ने कलिंग नहीं जीता कलिंग ने अशोक को जीत लिया था राजत्व का त्याग करके अशोक ने बुद्ध को प्राप्त कर लिया था। कलिंग लड़ने सम्राट गया था लौटा…

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कविता: डरपोक लड़की- नीना अन्दौत्रा पठानिया

Author By : नीना अन्दौत्रा पठानिया

 "कविता: डरपोक लड़की" वो डरपोक लड़की ढूंढती है प्रेमी में मां को जो भीड़ भरे बाजार में कस कर पकड़ ले कलाई को और वो नन्ही सी परी बनी खिंचती…

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कविता: “खूंटी बनाम औरत”- अंजू खरबंदा

Author By : अंजू खरबंदा

कविता: "खूंटी बनाम औरत" बचपन में खूंटी बनी भाई बहनों की दीदी आज बहुत थक गई मेरा होमवर्क कर दो न दीदी मुझसे नहीं होती ये तख्ती साफ चॉक मिट्टी…

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कतारों का लोकतंत्र

Author By : Ankit Kochar

बचपन से हमें कतारों से प्रेम सिखा दिया जाता है कतारों में खड़े होना हमारी जिंदगी का पहला अनुशासन का पाठ होता है और उस अनुशासन के पाठ से लेकर,…

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कविता: “समुद्र किनारे मीरा”- पुरुषोत्तम अग्रवाल

Author By : JIPL

"समुद्र किनारे मीरा" तुम्हारी बाट देखते देखते मैं स्वयं आ पहुँची तुम तक मेरे समुद्र श्याम अब तो अपनी बनाओ मुझे – निठुर मत भरमाओ मुझे मत छलो स्वयं को…

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कविता: “मैं आपका ईश्वर हूं”- पुनीत शर्मा

Author By : JIPL

मैं आपका ईश्वर हूं। जब मैं बात करूंगा समलैंगिकों के हक़ में आप ढूंढेंगे मेरे अंदर एक समलैंगिक जब मैं मुस्लिमों के हक़ की बात करूंगा आप ढूंढेंगे मेरे अंदर…

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जन्मदिन विशेष: जनाब विशाल बाग़ के 15 बेहतरीन जिंदाबाद शेर – JIPL

Author By : JIPL

दानिशमन्दो रस्ता बतला सकते हो, दीवाना हूँ, वीराने तक जाना है। जन्नत वाले थोड़ा पहले उतरेंगे, रिंदो को तो मैखाने तक जाना है। मुहब्बत को ज़रूरत खा गई है, लो…

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आँखों से यादों का दरिया बहता है

Author By : Vihaan Gupta

आँखों से यादों का दरिया बहता है ख़्वाब हमेशा मुझमें उसका बसता है हर तितली फूलों से कहती रहती है वो आए तो बाग़ सुनहरा लगता है मैं उसको खिड़की…

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हमारी ज़िंदगी की इस तरह हर शाम होती है

Author By : Vihaan Gupta

हमारी ज़िंदगी की इस तरह हर शाम होती है कभी ये खास होती है कभी ये आम होती है मुहब्बत भी किसी इंसान के बर्बाद होने का कभी आगाज़ होती…

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जब मैं उसके घर को जाया करता था

Author By : Vihaan Gupta

जब मैं उसके घर को जाया करता था दरवाज़ा खुद ही खुल जाया करता था वो उसका किरदार निभाया करती थी मैं अपना किरदार निभाया करता था वो चूल्हे में…

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दया से, दुआ से, अदा से, वफ़ा से

Author By : Vihaan Gupta

दया से, दुआ से, अदा से, वफ़ा से मुझे ठीक कर दो किसी भी दवा से चरागों को घर के खुले में न छोड़ो कहीं बुझ न जाएं वबा की…

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